








नंदनवन का चिड़ियाघर (नंदनवन जंगल सफारी, सेक्टर-39, नया रायपुर का हिस्सा) एक आधुनिक, संरक्षण-उन्मुख एवं शैक्षणिक चिड़ियाघर के रूप में विकसित किया गया है, जो ड्राइव-थ्रू सफारी अनुभव को पूरक बनाता है।
चिड़ियाघर लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जो 320 हेक्टेयर के विशाल नंदनवन परिसर का हिस्सा है।
यहाँ प्रदर्शनी क्षेत्रों को वैज्ञानिक (टैक्सोनॉमिक) वर्गीकरण के आधार पर व्यवस्थित किया गया है, जिससे दर्शकों की समझ और सीखने की क्षमता बढ़ती है।
चिड़ियाघर का एक प्रमुख आकर्षण मगरमच्छ प्रदर्शनी है, जो 9,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला एक प्राकृतिक-जैसा दलदली आवास प्रदान करता है।

यहाँ सफेद बाघ, रॉयल बंगाल टाइगर और तेंदुए जैसी प्रतिष्ठित बड़ी बिल्ली प्रजातियाँ प्राकृतिक वातावरण में देखी जा सकती हैं।

लायन सफारी में एशियाई शेर तथा ज़ू एवं बेयर सफारी सेक्शन में हिमालयी भालू देखे जा सकते हैं।

इस क्षेत्र में दलदली मगरमच्छ, मीठे पानी के कछुए और मॉनिटर लिज़र्ड प्रदर्शित हैं। क्रोकोडाइल लेक यहाँ का प्रमुख आकर्षण है।

हिप्पोपोटेमस और जंगली भैंसे जैसे विशाल शाकाहारी जीव संरक्षण-आधारित विशेष बाड़ों में रखे गए हैं।

यहाँ उड़ने वाले, बिना उड़ान वाले तथा जलचरी पक्षियों के लिए विशेष एवीयरी हैं, जहाँ खंडवा जलाशय से आने वाले प्रवासी पक्षी भी देखे जा सकते हैं।

प्रजातियों का प्रदर्शन स्वीकृत मास्टर प्लान के अंतर्गत चरणबद्ध रूप से विकसित किया गया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
यहाँ आप ज़ू के कुछ सबसे चंचल और मज़ेदार जीवों से मिलेंगे। इस क्षेत्र में लोमड़ी, सियार, भेड़िया और लकड़बग्घा जैसे समझदार जानवर रहते हैं, जो अपनी तेज़ इंद्रियों और समूह में रहने की आदत के लिए जाने जाते हैं।
साथ ही आपको मीरकैट और ऊदबिलाव जैसे बेहद प्यारे और जिज्ञासु जीव भी दिखेंगे, जो हमेशा दौड़ते-भागते, ज़मीन खोदते या पानी में खेलते रहते हैं।
आकार में छोटे होने के बावजूद, ये जीव प्रकृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और जंगलों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं।








नंदनवन चिड़ियाघर केवल प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र के रूप में भी कार्य करता है। यहाँ जंगली भैंसा (Bubalus arnee) जैसी विलुप्तप्राय स्थानीय प्रजातियों के लिए एक्स-सीटू (Ex-situ) प्रजनन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, घायल या बचाए गए पशुओं के उपचार और पुनर्वास की भी व्यवस्था है।
चिड़ियाघर वाले हिस्से में शुरुआत में 28 बाड़े बनाए गए थे। विस्तार योजना के अनुसार, 37 बाड़े बनाने का निर्णय लिया गया। यह विशाल सफारी और चिड़ियाघर कई सफारी ज़ोन में फैले हुए बड़े पशु समूहों का पालन-पोषण करता है। शाकाहारी सफारी में लगभग 106 शाकाहारी जानवर, बाघ सफारी में 4 बाघ और भालू सफारी में 4 भालू हैं। चिड़ियाघर अतिरिक्त प्रजातियों के लिए विशेष बाड़े उपलब्ध कराकर इन सफारियों को और भी सुविधाजनक बनाता है।






हर एनक्लोज़र में प्राकृतिक पेड़-पौधे, छाया, शरण स्थल एवं विश्राम क्षेत्र बनाए गए हैं जिससे पशुओं में तनाव कम रहे और उनका स्वाभाविक व्यवहार बना रहे।
पशु चिकित्सालय, भोजन भंडारण एवं रात्रि आवास के लिए समर्पित क्षेत्र मौजूद हैं।
खंडवा जलाशय का एक हिस्सा ज़ू में सम्मिलित किया गया है, जिससे स्थल जैव विविधता एवं पर्यावरणीय शिक्षा को बढ़ावा मिलता है।
वैज्ञानिक वर्गीकरण क्यों ज़रूरी है: एक ही परिवार या वर्ग की प्रजातियों को साथ देखने से दर्शक उनके पारिस्थितिक और विकासीय संबंध समझ सकते हैं।
मगरमच्छ की भूमिका: लदली मगरमच्छ जल-परिस्थितिकी को संतुलित रखते हैं और उनके बनाए हुए तालाब अन्य प्राणियों के लिए भी लाभदायक होते हैं।
विशाल शाकाहारी संरक्षण: जंगली भैंसा जैसी प्रजातियाँ पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण हैं और प्रजनन कार्यक्रम भविष्य के पुनर्वास में सहायक हो सकते हैं।
ज़ू का दौरा जंगल सफारी अनुभव का हिस्सा है। टिकटिंग समय और स्लॉट की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त करें। सामान्यतः समय सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहता है (सोमवार बंद)।
फ़ोटोग्राफ़ी नियम: व्यक्तिगत उपयोग के लिए फ़ोटो की अनुमति है; व्यावसायिक फोटोग्राफी हेतु अनुमति एवं शुल्क आवश्यक है।
सुविधाएँ: परिवारों और विद्यार्थियों के लिए समुचित पथ, साइनबोर्ड और जानकारी पट्ट उपलब्ध हैं।

