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1979 – नंदनवन ज़ू की शुरुआत

नंदनवन की कहानी 1979 से शुरू होती है, जब रायपुर के हतबंद, खारुन नदी के किनारे नंदनवन मिनी ज़ू की स्थापना की गई। उस समय छत्तीसगढ़ अविभाजित मध्यप्रदेश का हिस्सा था और शहर के पास वन्यजीव संरक्षण एवं जनसाधारण के मनोरंजन हेतु एक हरे-भरे आश्रय स्थल का निर्माण करने की पहल राज्य वन विभाग ने की थी। रायपुर के वरिष्ठ वन अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसके निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी ने 2008 में इसे "मिनी ज़ू" का दर्जा प्रदान किया। हालांकि पुराना ज़ू आकार में आज के सफारी की तुलना में छोटा था, लेकिन यह शीघ्र ही रायपुर और आसपास के लोगों का पसंदीदा स्थल बन गया। कुछ दर्जन एकड़ में फैले इस ज़ू में तेंदुआ, सियार, मगरमच्छ, चीतल (स्पॉटेड डियर) और अनेक प्रकार के पक्षी व सरीसृप देखे जा सकते थे। उस समय की पीढ़ी के लिए नंदनवन पाठ्यपुस्तकों के बाहर पहली बार वन्य जीवों से परिचय का माध्यम बना।

समय के साथ रायपुर में शहरीकरण बढ़ने और सीमित स्थान के कारण ज़ू का विस्तार कठिन हो गया। यही प्रमुख कारण था कि दशकों बाद राज्य सरकार ने इस अवधारणा को नवा रायपुर में कहीं बड़े क्षेत्रफल में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया, जिससे वर्तमान का नंदनवन जंगल सफारी अस्तित्व में आया।

Journey of Nandanvan Safari

नंदनवन सफारी एवं ज़ू कैसे बने ?

Inauguration of Nandanvan Safari

नवंबर 2000 में, छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, राज्य सरकार ने नई राजधानी नवा रायपुर के विकास की योजना को औपचारिक रूप दिया। 2008 की शुरुआत तक, रायपुर का पुराना नंदनवन मिनी ज़ू अपने बढ़ते हुए पशु-संग्रह और लगातार बढ़ती पर्यटक संख्या के लिए बहुत छोटा साबित हो रहा था।

एनआरडीए (नया रायपुर विकास प्राधिकरण) ने, तत्कालीन माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की दूरदर्शी सोच के तहत, 21.01.2011 को एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विश्व-स्तरीय ज़ू और सफ़ारी के विकास पर चर्चा हुई, जिसमें पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ़ और एपीसीसीएफ (CAMPA) भी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ सरकार ने नवा रायपुर को केवल नई राजधानी के रूप में ही नहीं, बल्कि आधुनिक संस्थानों और इको-टूरिज़्म के केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा। इसका विचार एक विश्व-स्तरीय ज़ू और सफ़ारी स्थापित करने का था, जो हज़ारों एकड़ में फैला हो — मिनी ज़ू से कहीं अधिक बड़ा और प्राकृतिक।

यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ी और अंततः 1 नवंबर 2016 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सफ़ारी का शुभारंभ किया गया। इसके बाद, 6 अक्टूबर 2019 को तत्कालीन माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा ज़ू सेक्शन का उद्घाटन किया गया।

जानवरों को नवा रायपुर क्यों शिफ्ट किया गया?

स्थान एवं प्राकृतिक आवास

स्थान एवं प्राकृतिक आवास

पुराना रायपुर ज़ू सीमित भूमि में बंधा था और शहर के फैलाव के कारण उसका विस्तार संभव नहीं था। जबकि नवा रायपुर में लगभग 800 एकड़ भूमि उपलब्ध थी, जहाँ मुक्त-पर्यटन क्षेत्र, बड़े बाड़े और प्राकृतिक परिदृश्य बनाए जा सके।

पशु कल्याण

पशु कल्याण

सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी के आधुनिक मानकों के अनुसार बड़े और प्रजाति-विशिष्ट बाड़ों तथा समृद्ध वातावरण की आवश्यकता थी। नई जगह पर जानवरों को अधिक प्राकृतिक आवास प्रदान किया जा सका।

आगंतुक अनुभव एवं शिक्षा

आगंतुक अनुभव एवं शिक्षा

नया स्थल खुली सफारी राइड्स और पारंपरिक ज़ू सेक्शन दोनों को जोड़ सका, जिससे रोमांच और संरक्षण शिक्षा का अद्वितीय संगम बना। यह संकरे पुराने ज़ू में संभव नहीं था।

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